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रविवार, 20 दिसंबर 2009

फिर होगी अगले बरस मुलाकात

उनकी एक झलक पाने की ख़ातिरहम नैन बिछाए रहते हैं,न जाने कब वो आ जाएंइस कारण एक आँख राह मेंऔर दूजा काम में टिकाए रखते हैं,इंतज़ार ख़त्म हुआउनका दीदार हुआ,सोचा था जब वो मिलेंगे हमसेदिल की बात बयाँ करेंगे,अपने सारे जज़बात उनको बता देंगे,हाय ये क्या गजब हुआजो सोचा था उसका विपरीत हुआ,वो आए..थोड़ा सा मुस्कुराएऔर कह दी उन्होने ऐसी बातजिससे दिल को हुआ आघात,कहा उस ज़ालिम नेमेरा हमदम है कोई और,मेरी मंज़िल है कोई औरबस कहने आयी थी दिल की बातफिर होगी अगले बरस मुलाकात...