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रविवार, 27 सितंबर 2009

महात्मा गांधी-------------" सत्याग्रह "

महात्मा गांधी जी के जन्म दिवस को देखते हुए हिन्दी साहित्य मंच इस अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ घटनाओं का उल्लेख श्रृखंला बद्ध रुप से कर रहा हैं। आशा है कि आप लोग पसन्द करेंगे। आज की कड़ी में हम गांधी जी द्वारा चलाये गये सत्याग्रह आंन्दोलन के बारे मे जानेंगेसत्याग्रह का शाब्दिक अर्थ सत्य के लिये आग्रह करना होता है। सत्याग्रह, उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका के भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून भंग शुरु करने तक संसार" नि:शस्त्र पतिकार' अथवा निष्क्रिय प्रतिरोध (पैंसिव रेजिस्टेन्स) की युद्धनीति से ही परिचित था।...

परमार्थ--------"डा. श्याम गुप्त"

प्रीति मिले सुख-रीति मिले, धन-प्रीति मिले, सब माया अजानी।कर्म की, धर्म की ,भक्ति की सिद्धि-प्रसिद्धि मिले सब नीति सुजानी ।ग्यान की कर्म की अर्थ की रीति,प्रतीति सरस्वति-लक्ष्मी की जानी ।रिद्धि मिली,सब सिद्धि मिलीं, बहु भांति मिली निधि वेद बखानी ।सब आनन्द प्रतीति मिली, जग प्रीति मिली बहु भांति सुहानी ।जीवन गति सुफ़ल सुगीत बनी, मन जानी, जग ने पहचानी ॥जब सिद्धि नहीं परमार्थ बने, नर सिद्धि-मगन अपने सुख भारी ।वे सिद्धि-प्रसिद्धि हैं माया-भरम,नहिं शान्ति मिले,हैंविविध दुखकारी।धन-पद का, ग्यान व धर्म का दम्भ,रहे मन निज़ सुख ही बलिहारी।रहे मुक्ति...