हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

मंगलवार, 14 अप्रैल 2009

जागरण [लघुकथा]-कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

कुमारेन्द्र सिंह सेंगर - आपका जन्म जनपद-जालौन, उ0प्र0 के नगर उरई में वर्ष 1973 में जन्म। प्रारम्भिक शिक्षा उरई में तथा उच्च शिक्षा भी उरई में सम्पन्न हुई। लेखन की शुरुआत वर्ष 1882-83 में एक कविता (प्रकाशित) के साथ हुई और तबसे निरंतर लेखन कार्य में लगे हैं। हिन्दी भाषा के प्रति विशेष लगाव ने विज्ञान स्नातक होने के बाद भी हिन्दी साहित्य से परास्नातक और हिन्दी साहित्य में ही पी-एच0डी0 डिग्री प्राप्त की।लेखन कार्य के साथ-साथ पत्रकारिता में भी थोड़ा...

अनसुलझी वो..............[एक कविता ]

मुझमें ढूढ़ती पहचान अपनीबार बार वो ,जान क्या ऐसाथाजिसकी तलाश थी उसको ,अनसुलझे सवाल कोलेकर उलझती जातीकभी मैंने साथदेना चाहा थाउसकी खामोशियों को,उसके अकेलेपन को ,पर वो दूर जाती रहीमुझसे ,अचानक ही एक एहसासपास आता हैबंधन काबेनाम रिश्ते का ,जिसमें दर्द है ,घुटन है ,मजबूरियां है,शर्म है ,तड़प है ,उम्मीद है ।मैं समझते हुए भीनासमझ सालाचार हूँउसके सामनेशायद बयां कर पाऊं कभीउसको अपने आप में...

गज़ल

मेहरबानियों का इज़हार ना करोमहफिल मे यूँ शर्मसार ना करोदोस्त को कुछ भी कहो मगरदोस्ती पर कभी वार ना करोप्यार का मतलव नहीं जानतेतो किसी से इकरार ना करोजो आजमाईश मे ना उतरे खराऐसे दोस्त पर इतबार ना करोजो आदमी को हैवान बना देंखुद मे आदतें शुमार ना करोइन्सान हो तो इन्सानियत निभाओइन्सानों से खाली संसार ना करोकौन रहा है किसी का सदा यहांजाने वाले का इन्तज़ार ना करोमरना पडे वतन पर कभी तोभूल कर भी इन्कार ना करोपाप का फल वो देता है जरूरफिर माफी की गुहार ना ...