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शुक्रवार, 15 मई 2009

घर का चूल्हा [एक कविता ] - प्रस्तुति " शम्भू चौधरी जी " की

घर का चूल्हा जलता देखाचूल्हे में लकड़ी जलती देखीउस पर जलती हाँड़ी देखी,हाँड़ी में पकते चावल देखे,फिर भी प्राणी जलते देखे।घर का चूल्हा जलता देखा।। हाय.. रे..घर...का..चूल्हा...।घर का चूल्हा जलता देखा।। खेतों में हरियाली देखीघर में आती खुशीयाली देखीबच्चों की मुस्कान को देखा,मन में कोलाहल सा देखा,मंडी में जब भाव को देखाश्रम सारा पानी सा देखा। हाय.. रे..घर...का..चूल्हा...।घर का चूल्हा जलता देखा।। घर का चूल्हा जलता देखाबर्तन-भाँडे बिकता देखाहाथ का कंगना...

वर्षा सिंह की कविता {आमंत्रित कवियत्री } - गर्भ में पल रहे शिशु के लिए प्रार्थना

हे! तुम आना ख़ुशियां लाना और बांटना भी तुम मुस्कुराना और सबको मुस्कुराने की वजह देना हे! तुम बोलना बक-बक-बक-बक पर किसी का दिल न दुखाना हे! तुम्हें ये धरती मिलेगी जिसे हम सबने मिलकर उजाड़ा सारा पानी सोख लिया सारे पेड़ उखाड़ लिए सारा तेल धुआं बनाया सारी बिजली लुटा दी जब तुम आना पेड़ उगाना पानी बचाना प्रकृति पर जान देना तुम्हारी ज़िंदगी प्रकृति का ही तो वरदान है हे! तुम ...

हिन्दी साहित्य मंच " कविता प्रतियोगिता सूचना " [जून से आयोजन ] - संचालक (हिन्दी साहित्य मंच )

हिन्दी साहित्य मंच " कविता प्रतियोगिता " का आयोजन जून माह से शुरू हो रहा है । इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी कवि , रचनाकार , लेखक से अनुरोध है कि वह इस कार्यक्रम को सफल बनाने में हमारा सहयोग करें । अन्तरजाल के माध्यम से प्रथम कविता प्रतियोगिता के आप सभी हमें अपनी रचना मई माह के अन्तिम दिन तक भेंजें । सर्वश्रेष्ठ प्रथम तीन रचना को पुरस्कृत किया जायेगा । साथ दो रचनाओं को सांत्वना पुरस्कार भी दिया जायेगा । हिन्दी साहित्य के विकास में अपनी भागीदारी देकर हमारे प्रयास को सफल बनाये ।हिन्दी साहित्य मंच " हिन्दी प्रेमियों का मंच " है । यहां पर...