गीत***************ये बिजली का कड़कनाआँख मिलना,मिलके झुक जानाये नाज़ुक लब फड़कनाकह न पाना ,यूँ ही रुक जानाहया से सुर्ख कोमल गालकाली ज़ुल्फ क्या कहियेसमझते हैं निगाहों कीज़ुबां कोआप चुप रहिऐ ।ये तेरी नर्म नाज़ुकअंगुलियों का छू जरा जानाश्वांसें तेज हो जानापसीने से नहा जानाहर एक आहट पे तेराचौंक जानाहाय क्या कहियेसमझते हैं निगाहों कीज़ुबां कोआप चुप रहिये ।कदम तेरे यूँ उठनाछम से गिरना,गिर के रुक जानाकभी यूँ ही ठिठक जानाकभी यूँ ही गुजर जानाअजब सी कशमकश हैदिल की हालतहाय क्या कहियेसमझते हई निगाहों कीज़िबां कोआप चुप रहिये ।मिलन पर दूर जनासकपकाना कह नहीं पानाबिछुडने...