हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

गुरुवार, 28 मई 2009

गीत

गीत***************ये बिजली का कड़कनाआँख मिलना,मिलके झुक जानाये नाज़ुक लब फड़कनाकह न पाना ,यूँ ही रुक जानाहया से सुर्ख कोमल गालकाली ज़ुल्फ क्या कहियेसमझते हैं निगाहों कीज़ुबां कोआप चुप रहिऐ ।ये तेरी नर्म नाज़ुकअंगुलियों का छू जरा जानाश्वांसें तेज हो जानापसीने से नहा जानाहर एक आहट पे तेराचौंक जानाहाय क्या कहियेसमझते हैं निगाहों कीज़ुबां कोआप चुप रहिये ।कदम तेरे यूँ उठनाछम से गिरना,गिर के रुक जानाकभी यूँ ही ठिठक जानाकभी यूँ ही गुजर जानाअजब सी कशमकश हैदिल की हालतहाय क्या कहियेसमझते हई निगाहों कीज़िबां कोआप चुप रहिये ।मिलन पर दूर जनासकपकाना कह नहीं पानाबिछुडने...

मेरी दीवानगी [ गज़ल ] - मुस्तकीम खान

नाम- मुस्तकीम खानशिक्षा-स्नातक( बी.काम) , परास्नातक ( मास्टर आफ आर्ट एण्ड मास कम्युनिकेशन ) , माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय , नोएडा कैंपस,जन्म- २९ मार्च १९८८ , आगरा , उत्तर प्रदेश ।रूचि- गज़ल, गीत लेखन ,गायन ।संपर्क- मुस्तफा क्वाटर्स , आगरा कैंट, आगरा ।मो- ०९९९०८४०३३९ .मेरी दीवानगीमुझको किसी से नफरत नहीं है ,इतना आवार हूँ कि फुर्सत नहीं है ।प्यार की कुर्बानी गिना रहे हो,,कहते क्यूँ नहीं कि हिम्मत नहीं है ।।हुस्न के बाजार मे दिल का ये...

खामोश रात में तुम्हारी यादें

खामोश रात में तुम्हारी यादें,हल्की सी आहट के साथदस्तक देती हैं,बंद आखों से देखता हूँ तुमको,इंतजार करते-करते परेशांनहीं होता अब,आदत हो गयी है तुमको देर से आने की,कितनी बार तो शिकायत की थी तुम से ही,परक्या तुमने कसी बात पर गौर किया ,नहीं न ,आखिर मैं क्यों तुमसे इतनी ,उम्मीद करता हूँ ,क्यों मैं विश्वास करता हूँ,तुम पर,जान पाता कुछ भी नहीं ,परतुमसे ही सारी उम्मीदें जुड़ी हैं,तन्हाई में,उदासी में ,जीवन के हर पल में,खामोश दस्तक के साथआती हैं तुम्हारी यादें,महसूस करता हूँ तुम्हारी खुशबू को,तुम्हारे एहसास को,तुम्हारे दिल की धड़कन का बढ़ना,औरतुम्हारे...