“उसकी आवाज़ बता देती हैं मैं कहाँ हूँ ग़लतमेरी माँ के समझाने की कुछ अदा निराली है .”आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म मे इसी माँ की कोख़ से पैदा करना ..हमारा जीवन इसी गोद मे सार्थक हैं. हमारा बचपन इसी ममता का प्यासा हैं और जन्मो -जन्मान्तर तक हम इसी ममत्व का नेह्पान करते रहें ..माँ आप हमारा प्रणाम स्वीकार करो और हमे आशीर्वाद दो .आज फिर नेह से हाथ सिर पर फेर माँहूँ बहुत...