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गुरुवार, 3 जनवरी 2013

मेरा परिचय

पता नही क्यू मै अलग खङा हूं दुनिया से ! अपने सपनो को ढूढता विमुख हुआ हूं दुनिया से !! पता नही क्यूं मै इस दुनिया से अलग हूं ! मगर मै सोचता कि दुनिया मुझसे अलग है !!पता नही क्यूं अब ताने सुन कष्ट नही होता !पता नही क्यूं अब तानो का असर नही होता !!पता नही क्यूं लोगो को है मुझसे है शिकायत !पता नही क्यूं बिना बात के दे रहे है हिदायत !!पता नही क्यूं लोगो की सोच है इतनी निर्मम !पतानही क्यूं इस दुनिया की डगर है इतनी दुर्गम ...