बंद करता हूं जब आंखेसपने आखों में तैर जाते हैं ,जब याद करता हूँ तुमकोयादें आंसू बनके निकल जाती हैं ,ये खेल होता रहता है ,यूं हर पल , हर दिन ही ,तुम में ही खोकर मैं ,पा लेता हूँ खुद को ,जी लेता हूँ खुद को ,बंद करता हूँ आंखें तोदिखायी देती है तुम्हारी तस्वीर ,सुनाई देती है तुम्हारी हंसी कानों में,ऐसे ही तो मिलना होता है तुमसे अब।।बंद कर आंखें देर तक,महसूस करता हूँ तुमको ,और न जाने कबचला जाता हूँ नींद के आगोश में ,तुम्हारे साथ ही...