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शनिवार, 19 दिसंबर 2009

यार पुराने छूट गए तो छूट गए ---(जतिन्दर परवाज़ )

यार पुराने छूट गए तो छूट गएकांच के बर्तन टूट गए तो टूट गएसोच समझ कर होंट हिलाने पड़ते हैंतीर कमाँ से छूट गए तो छूट गएशहज़ादे के खेल खिलोने थोड़ी थेमेरे सपने टूट गए तो टूट गएइस बस्ती में कौन किसी का दुख रोयेभाग किसी के फूट गए तो फूट गएछोड़ो रोना धोना रिष्ते नातों परकच्चे धागे टूट गए तो टूट गएअब के बिछड़े तो मर जाएंगे ‘परवाज़’हाथ अगर अब छूट गए तो छूट...

---(जतिन्दर परवाज़ )

यार पुराने छूट गए तो छूट गएकांच के बर्तन टूट गए तो टूट गएसोच समझ कर होंट हिलाने पड़ते हैंतीर कमाँ से छूट गए तो छूट गएशहज़ादे के खेल खिलोने थोड़ी थेमेरे सपने टूट गए तो टूट गएइस बस्ती में कौन किसी का दुख रोयेभाग किसी के फूट गए तो फूट गएछोड़ो रोना धोना रिष्ते नातों परकच्चे धागे टूट गए तो टूट गएअब के बिछड़े तो मर जाएंगे ‘परवाज़’हाथ अगर अब छूट गए तो छूट...