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मंगलवार, 20 जुलाई 2010

नई दुनिया ... नई उडान ... आओ बनाए ........ अलग पहचान ............(लेख).................मोनिका गुप्त.

कल मैने एक बस स्टाप पर पढा कि “यहाँ बस ठहरती है समय नही” .... सच, समय तो कभी नही रुकता. बस चलता ही रहता है. अब ये अपने उपर है कि हम इसका कितना इस्तेमाल कर पाते हैं ...इसमे कोई शक नही कि जमाना बदल रहा है. चारो तरफ बस बदलाव ही बदलाव है ... कोई भी क्षेत्र ले लो हर जगह यही हाल है. समय की माँग़ को देखते हुए आजकल पढाई पर भी बहुत जोर दिया जाने लगा है ..बहुत अच्छा लगता है यह सब देख कर. पर दुख तब होता है जब इतनी पढाई के बाद भी ढ्ग की नौकरी नही मिलती. खास कर लडकियो और महिलाओ के लिए तो और भी ज्यादा सोचने की बात हो जाती है ...ऐसे मे ना सिर्फ उन्हे घर बैठना...