कई दिनों से घर जाने की तैयारी चल रही थी और अब तो होली बस दो ही दिन दूर था। हमेशा की तरह इस बार भी घर जाने को लेकर मन बहुत ही उत्साहित था । भले ही अब घर जाने के बीच का अंतराल कम हो गया हो लेकिन घर पर एक अलग तरह का ही सुख मिलता है। घर पर न तो काम का बोझ और न ही खाना बनाने की चिंता, बर्तन और कपड़े धोना जो मुझे सबसे ज्यादा दुष्कर लगता है उससे भी छुटकारा मिल जाता है। घर पर बार-बार खाने को लेकर मम्मी का आग्रह उनका प्यार अच्छा लगता है। नहीं तो जब बाहर होते हैं तो खाना खा लें समय पे बड़ी बात है अब ये बात और है कि ये सारे सुख कुछ दिन के ही होते हैं। जब से...