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सोमवार, 11 मई 2009

मेरी मां [एक कविता] - डॉ.योगेन्द्र मणि

कुछ कारणों से इस कविता का प्रकाशन समय पर न हो सका जिसके लिए हमें खेद है । मदर्स डे की यह प्रस्तुति .मेरी माँ ओ स्नेहमयी माँकैसे तेरा गुण-गान करूँ मैंपौधा हूँ तेरी बगिया काशत-शत तुझे प्रणाम करू मैं ॥तूफानों से लडी हमेशाहँस-हँस कर मेरे ही लिऐनो मास तक की थी तपस्यातूनें माँ मेरे ही लिऐअपने रक्त का दूध बनाकरसींचा था मेरे जीवन कोतेरे रक्त की बूँद-बूँद काकैसे यहाँ बखान करूँ मैंपौधा हूँ तेरी बगिया का.............॥इन्द्रासन सम गोद तेरी हैअन्य सभी सुख झूँठे हैंफीके जग के मधुर बोलमाँ तेरी बोल अनूठे हैंअपनी चिन्ता छोड सदा हीसवांरा था मेरे जीवन कोमुख से कुछ...