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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009

समाज सेवा - लघुकथा (डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर)

श्रीमान जी व्यवस्था की अव्यवस्था से लड़ते-लड़ते जब हार गये तब गहन अंधकार के बीच विकास की नई रोशनी उन्हें दिखलाई दी या कहिये कि उनके मन-मष्तिष्क में प्रस्फुटित हो गई। आनन-फानन में एक संस्था का गठन, शहर के बीचोंबीच शानदार कार्यालय, क्षेत्रीय विधायक जी द्वारा उदघाटन, दो-चार फोटो, फ्लैश, पत्रकार और फिर समाचार-पत्रों में सुर्खियाँ।नेताजी का भाव-विभोर करता भाषण और श्रीमान जी के हृदय को छूने वाले उद्देश्य; संस्था के गठन का उद्देश्य, ग्रामीणों, असहायों के विकास को संकल्पित निश्चय। सभी कुछ लाजवाब, सभी कुछ सराहनीय।श्रीमान जी का कार्य प्रारम्भ हो चुका था।...