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मंगलवार, 31 मार्च 2009

मैं तो यहीं हूँ.....तुम कहाँ हो....!!.......[एक कविता] भूतनाथ जी की कलम से

इक दर्द है दिल में किससे कहूँ.....कब तलक यूँ ही मैं मरता रहूँ !!सोच रहा हूँ कि अब मैं क्या करूँकुछ सोचता हुआ बस बैठा रहूँ !!कुछ बातें हैं जो चुभती रहती हैंरंगों के इस मौसम में क्या कहूँ !!हवा में इक खामोशी-सी कैसी हैइस शोर में मैं किसे क्या कहूँ !!मुझसे लिपटी हुई है सारी खुदाईतू चाहे "गाफिल" तो कुछ कहूँ !!००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००दूंढ़ रहा हूँ अपनी राधा,कहाँ हैं तू...मुझको बुला ले ना वहाँ,जहाँ है तू !!मैं किसकी तन्हाई में पागल हुआ हूँदेखता हूँ जिधर भी मैं,वहाँ है तू !!हाय रब्बा मुझको तू नज़र ना आएजर्रे-जर्रे में तो है,पर...