लंबे समय से हम इस बात पर बहस की जा रही है कि हमारा समाज उच्छृंखल होता जा रहा है। खास कर यह उच्छृंखलता यौन मामलों में ज्यादा ही दिखाई दे रही है। समलैंगिता को मान्यता देना, यौन शिक्षा का समर्थन करना और इससे जुड़े पहलुओं का महिमामंडन करना वर्तमान समय में हमारे समाज में आम हो गया है। देखिए, जो कुछ भी होता है, इसी समाज में होता है और इस बात की दुहाई के साथ कि यह समाज का एक अंग है। मैं इससे इनकार नहीं करता।यह बात सर्वमान्य है कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है और यह भी सही है कि समाज अपने में कुछ नहीं है, जो कुछ भी है वह तो व्यक्तियों का समूह है। इसलिए व्यक्ति...