सुमि, तुम ! के.जी. ! अहो भाग्य ,क्या तुमने आवाज़ दी ? नहीं | मैंने भी नहीं | फिर ? हरि इच्छा , मैंने कहा | वही खिलखिलाती हुई उन्मुक्त हंसी | चलो , वक्त मेहरवान तो क्या करे इंसान | कहाँ जाना है, सुमि ने पूछा | मुम्बई, 'राशी' की कोंफ्रेंस है |और तुम ? मुम्बई,पी जी परीक्षा लेने | मेडिकल कालेज के गेस्ट हाउस में ठहरूंगी , और तुम | मेरीन ड्राइव पर | सागर तीरे ! नहीं भई, रेस्ट हाउस है ,चर्च गेट पर | चलो तुम्हारे साथ मेरीन ड्राइव पर घूमने का आनंद लेंगे , पुराणी यादें ताजा...