अचानक .........छोड़ गई तुम मेरा साथ,बुझा गयी अपना जीवन दीप,बिना कुछ कहे,बिना कुछ सुनेकर गयी मेरे जीवन मेंकभी न ख़त्म होनेवालाअँधियारा .........जन्म-जन्मान्तर के लिए थामा थातुमने मेरा हाथ ,वेदी पर बैठ खाई थी कसमेंसंग जीने ,संग मरने की ।इतनी भी क्या जल्दी थी,ऐसी भी क्या थी बात ,जो मुझे छोड़ गयी -जीवन के दोराहे परयादों के अंतहीन सुरंग मेंआखिरी सांस तकभटकने के लिए ।क्या करूंगाऐसा नीरस और निरर्थक जीवनजिसमें तुम नहीं ,तुम्हारा साथ नहीं ।कैसे कटेगा दिन,कैसे कटेंगी रातेंतेरे बिना!हर पल-हर क्षणयाद आएगी तू,तेरे साथ कटा जीवन,तेरे साथ बटी बातें ,घर के भीतर,घर...