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सोमवार, 9 अगस्त 2010

कितने पास कितने दूर ...---(लेख) मोनिका गुप्ता

जमाना नेट का है. चारो तरफ कम्प्यूटर ही दिखाई देते हैं .बहुत अच्छा लगता है यह जान कर कि निसंदेह हम प्रगति के पथ पर अग्रसर है. जहाँ तक नौजवानो की बात है उनमे सीखने की लग्न बडो से कही ज्यादा है और वो ना सिर्फ जल्दी से सीख भी लेते हैं बलिक अपने बडो को भी सीखा देते हैं. पर सारा दिन उससे चिपके बैठे रहना भी तो सही नही है ना खाने की चिंता ना पढाई की. एक ही घर मे रहते हुए भी ऐसा लगता है कि सुबह से कोई बात ही नही हुई. स्कूल, कालिज या दफ़्तर से आते ही बस लगे रहते हैं कम्प्यूटर में ...कल ही मेरे एक मित्र खुशी खुशी बता रहे थे कि उन्होनें वेब केम लिया है...