ताजमहल के नीचे तहखाने मेंकुलबुलाने लगती हैं दो आत्मायेंचिपट जाती हैं वे एक दूसरे सेकहीं कोई अलग न कर दे उन्हेंदबे पाँव बाहर आती हैंअपनी ही रची सुंदरता को निहारनेपर ये क्या ?बाहर देखा तो यमुना जी सिमटती नजर आयींदूर-दूर तक गड़गड़ करती मशीनेंकोलाहल और धुँओं के बीचकाले पड़ते सफेद संगमरमरकैमरों के फ्लैश के बीचउनकी बनायी सुंदरता पर दावे करते लोगअचानक उन्हें ताज दरकता नजर आयावे तेजी से भागकरअपनी-अपनी कब्रों में सिमट गए !!कृष्ण कुमार य...