सूरत पे आँखें हरदम हैतेरे भीतर कितना गम हैनिकलो घर से, बाहर देखोप्रायः सबकी आँखें नम हैसमझ सका दुनिया को जितनामेरा गम कितनों से कम हैजितना तेज धधकता सूरजदुनिया में उतना ही तम हैमुझको चाहत नहीं मलय कीमेरा जीवन तो शबनम हैसब मिलकर के चोट करोगे?क्योंकि लोहा अभी गरम हैहोश में सारे परिवर्तन होंसुमन के भीतर में संयम...