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गुरुवार, 10 सितंबर 2009

हिन्दी पखवाड़े में आज का व्यक्तित्व ---"जैनेंद्र कुमार"

हिन्दी पखवाड़े को ध्यान में रखते हुए हिन्दी साहित्य मंच नें 14 सितंबर तक साहित्य से जुड़े हुए लोगों के महान व्यक्तियों के बारे में एक श्रृंखला की शुरूआत की है । जिसमें भारत और विदेश में महान लोगों के जीवन पर एक आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है । । आज की कड़ी में हम "जैनेंद्रकुमार जी" के बारे में जानकारी दे रहें ।आप सभी ने जिस तरह से हमारी प्रशंसा की उससे हमारा उत्साह वर्धन हुआ है । उम्मीद है कि आपको हमारा प्रयास पसंद आयेगाप्रेमचंदोत्तर उपन्यासकारों में जैनेंद्रकुमार का विशिष्ट स्थान है। वह हिंदी उपन्यास के इतिहास में मनोविश्लेषणात्मक परंपरा के प्रवर्तक...

"गुमसुम तनहा बैठा होगा"------जतिन्दर परवाज़

गुमसुम तनहा बैठा होगासिगरेट कश भरता होगाउसने खिड़की खोली होगीऔर गली में देखा होगाज़ोर से मेरा दिल धड़का हैउस ने मुझ को सोचा होगासच बतलाना कैसा है वोतुम ने उस को देखा होगामैं तो हँसना भूल गया हूँवो भी शायद रोता होगाठंडी रात में आग जला करमेरा रास्ता तकता होगाअपने घर की छत पे बेठाशायद तारे गिनता ह...