खामोश रात में तुम्हारी यादें,हल्की सी आहट केसाथ दस्तक देती हैं,बंद आखों से देखता हूँ तुमको,इंतजार करते-करतेपरेशां नहीं होता अब,आदत हो गयी है तुमको देर से आने की, कितनी बार तो शिकायत की थी तुम से ही,परक्या तुमने किसी बात पर गौर किया ,नहीं न ,आखिर मैं क्यों तुमसे इतनी ,उम्मीद करता हूँ ,क्यों मैं विश्वास करता हूँ,तुम पर,जान पाता कुछ भी नहीं ,पर तुमसे ही सारी उम्मीदें जुड़ी हैं,तन्हाई में,उदासी में ,जीवन के हस पल में, खामोश दस्तक के साथ आती हैं तुम्हारी यादें,महसूस करता हूँ तुम्हारी खुशबू को,तुम्हारे एहसास को,तुम्हारे दिल की धड़कन का बढ़ना, और तुम्हारे...