गज़ल्अपना इतिहास पुराना भूल गयेलोग विरासत का खज़ाना भूल गयेरिश्तों के पतझड मे ऐसे बिखरेलोग बसंतों का जमाना भूल गयेदौलत की अँधी दौड मे लोगमानवता निभाना भूल गयेभूल गये गरिमा आज़ादी कीशहीदों का कर्ज़ चुकाना भूल गयेजो धर्म के ठेकेदार बनेखुद धर्म निभाना भूल गयेपत्नी की आँ चल मे ऐसे उलझेमाँ का पता ठिकाना भूल गयेपरयावरण पर भाशण देतेपर पेड लगाना भूल गयेभूल गये सब प्यार का मतलवलोग हंसना हसाना भूल ...