हमारा प्रयास हिंदी विकास आइये हमारे साथ हिंदी साहित्य मंच पर ..

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

थम सा गया है वक्त....(गजल)...................नीरज गोस्वामी

होगी तलाशे इत्र ये मछली बज़ार मेंनिकले तलाशने जो वफ़ा आप प्‍यार मेंचल तो रहा है फिर भी मुझे ये गुमाँ हुआथम सा गया है वक्त तेरे इन्तजार मेंजब भी तुम्हारी याद ने हौले से आ छुआकुछ राग छिड़ गये मेरे मन के सितार मेंकिस्मत कभी तो पलटेंगे नेता गरीब कीकितनों की उम्र कट गयी इस एतबार में दुश्वारियां हयात की सब भूल भाल करमुमकिन नहीं है डूबना तेरे खुमार मेंये तितलियों के रक्स ये महकी हुई हवालगता है तुम भी साथ हो अबके बहार मेंवो जानते हैं खेल में होता है...