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सोमवार, 23 सितंबर 2013

एक चिट्ठी मिली ..... मेरे यार की --- -(लक्ष्मी नारायण लहरे ) बरसों की खबर -खबर बनकर रह गयी  गलियों की चौड़ाई सिमट गयी  उपाह-फोह की आवाज कमरे में दम तोड़ दी  बदल ,गयी लोग -बाक की भाषा  नजरें बदल गयी नया बरस आ गया  ख़बरों में नई उमंग -तरंग नए संपादक आ गए  गलियां में  जो हवा बह रही थी  ओ हवा प्रदूषित हो गयी  प्यार करने वाले पथिक  अपनी राह बदल दी  लोगों का भ्रम जब टूटा  पथिक की नई कहानी बन गयी  सच है ,भ्रम का कोई पर्याय नहीं होता  मृत्यु निश्चित है पर  उस...