हिन्दी साहित्य से लोगों की अरुचि दिनों दिन तेजी से बढ़ती जा रही है। बच्चों को आज साहित्य से वंचित रहना पङता है और कमोवेश जो शिक्षा के माध्यम से दिया जाता है वह ना काफी है। जब कोई युवा पीढी का नागरिक यह पूछता है" कि मैथिलीशरण गुप्त या सुमित्रा नंदन पंत कौन हैं? तो इन राष्ट्रकवियों पर एक सवालिया निशान सा लगता है । कहीं न कहीं साहित्य में महान कवियों को आज भुलाया जा रहा है । जो अपेक्षा आज मीडिया , सरकार व पढ़े लिखे वयक्ति से की जाती है वह उस पर खरे नहीं उतरते हैं । थोड़ा पीछे की बात की जा तो कमलेश्वर जी का निधन हुआ था । देश ने महान साहित्यकार, आलोचक...