जिस किसी ने भी 'मजबूरी का नाम, महात्मा गांधी' जैसी कहावत का आविष्कार किया, उसकी तारीफ की जानी चाहिए।महात्मा गांधी का नाम जपना और नीलाम होती उनकी नितांत निजी वस्तुओं को भारत लाना सरकार की मजबूरी है। महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने गांधी जी की वस्तुओं को भारत लाने का मुद्दा इतना उछाल दिया कि विशुद्ध मजबूरी में मनमोहन सिंह सरकार को सक्रिय होना पड़ा। लेकिन इस सक्रियता के पीछे कितनी उदासीनता थी, इसका पता सरकार और नीलामी में इन वस्तुओं को खरीदने वाले शराब- निर्माता और प्रसिद्ध उद्योगपति विजय माल्या के दावों- प्रतिदावों से साफ हो जाता है। सरकार...