( 1 ) सोना तपता आग में , और निखरता रूप .
कभी
न रुकते साहसी , छाया हो या धूप.
छाया हो या धूप ,
बहुत सी बाधा आयें .
कभी न बनें अधीर ,नहीं मन में घवराएँ .
'ठकुरेला'
कवि कहें , दुखों से कैसा रोना .
निखरे सहकर कष्ट
, आदमी हो या सोना .
( 2 )
होता है मुश्किल वही,...