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शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

हिन्दी पखवाड़े में आज का व्यक्तित्व --- अयोध्या सिंह उपाध्याय " हरिऔध"

हिन्दी पखवाड़े को ध्यान में रखते हुए हिन्दी साहित्य मंच नें 14 सितंबर तक साहित्य से जुड़े हुए लोगों के महान व्यक्तियों के बारे में एक श्रृंखला की शुरूआत की है । जिसमें भारत और विदेश में महान लोगों के जीवन पर एक आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है । । आज की दूसरी कड़ी में हम " अयोध्या सिंह उपाध्याय " हरिऔध"" के बारे में जानकारी दे रहें ।आप सभी ने जिस तरह से हमारी प्रशंसा की उससे हमारा उत्साह वर्धन हुआ है । उम्मीद है कि आपको हमारा प्रयास पसंद आयेगा"देखकर बाधा विविध,बहु विघ्न घबराते नहीं राह भरोसे भाग के दुःख भोग पछताते नहीं ,काम कितना ही कठिन हो , किन्तु...

" जाने क्यूँ " - नजर- ए- गजल (पंकज तिवारी जी )

'चूक' हुई या 'खोट' थी कोई आखिर क्यूँ नाकाम हुए।नेक नीयत रखी थी हमने, जाने क्यूँ बदनाम हुए।।प्यार की पौध लगाकर हमने खाद वफ़ा की डाली थी,आज दरख़्त वो मुरझाया है, ऐसे क्यूँ अंजाम हुए।।यूँ तो तेरी जानिब से भी प्यार ही प्यार मिला हमको,बंजर आज हुआ क्यूँ रिश्ता, गुलशन क्यूँ शमशान हुए।।छोटी-छोटी बातें, यादें, सपने कहते-सुनते थे,पहले जैसा हर मंजर है, फिर हम क्यूँ अंजान हुए।।प्यार मुहब्बत की बातें अब बेमानी सी लगती हैं,हर सू जख़्म के ताने-बाने, मंजर ये क्यूँ आम हुए।।'चूक' हुई या 'खोट' थी कोई आखिर क्यूँ नाकाम हुए।नेक नीयत रखी थी हमने, जाने क्यूँ बदनाम हु...