थोड़ा-थोड़ा ही सा सब कुछ सब कोई कर रहे हैं...... और परिणाम.....?? बहुत कुछ.......!! सभी थोड़ा-थोड़ा-सा धुंआ उड़ा रहे हैं...... और सबका मिला जुलाकर......... हो जाता है ढेर सारा धुंआ......!! थोडी-थोडी-सी चोरी कर रहें हैं सभी..... और क्या ऐसा नहीं लगता कि- सारे के सारे चोर ही हों.....!! थोडी-थोडी-सी गुंडा-गर्दी होती है.... और परिणाम.....?? बाप-रे-बाप सारी दुनिया तबाह हो जैसे.....!! थोडी-थोडी-सी छेड़खानी होती है सब जगह.... और सारी धरती पर की...... सारी स्त्रियों और लड़कियों की- निगाहें चलते वक्त गड़ी होती हैं..... जमीं के कहीं बहुत ही भीतर....!!...