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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

सफर के साथ मैं...............neeshoo tiwari

सफर के साथ मैंया फिर मेरे साथ सफरकुछ ऐसा रिश्ता बन गया थाकब, कहाँ, और कैसे पहुँच जाना हैबताना मुश्किल थाऐसे ही रास्तों पर कई जाने पहचाने चहरे मिलतेऔरफिर वो यादें धुंधली चादर में कहीं खो जातीमैं कभी जब सोचता हूँ इन लम्हों को तोयादें खुद ब खुद आखों में उतर आती हैं वो बस का छोटा सा सफरअनजाने हम दोनोंचुपचाप अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जा रहे थेवो मेरे सामने वाली सीट पर शांत बैठी थीउसके चेहरा न जाने क्यूँ जाना पहचाना सा लगाऐसे मेंहवा के एक झोंके नेकुछ बाल उसके चेहरे पर बिखेरे थेवो बार-बारअपने हाथों से बालों को प्यार से हटाती थीलेकिन कुछ पल बीतने के बादवो...

प्रणय-कथा अब कौन कहेगा ? --(गीत)----डॉ. नागेश पांडेय "संजय"

तुमको तो जाना ही होगा,लेकिन क्या यह भी सोचा है -दर्द हमारा कौन सहेगा ?तपते मरुथल में पुरवाईके झोंके अब क्या आएँगे ?रुँधे हुए कंठों से कोकिलगीत मधुर अब क्या गाएँगे ?तुमको तो गाना ही होगा,लेकिन क्या यह भी सोचा है -अब उस लय में कौन बहेगा ?यह कैसा बसंत आया है ?हरी दूब में आग लगा दी !निंदियारे फूलों की खातिरउफ्! काँटों की सेज बिछा दी !इसको अपनाना ही होगा,लेकिन क्या यह भी सोचा है -आशाओं का महल ढहेगा।एक बार फिर छला भँवर ने,डूब गई मदमाती नैया।एक बार फिर बाज समय कालील गया है नेह चिरैया।मन को समझाना ही होगा,लेकिन क्या यह भी सोचा है -प्रणय-कथा अब...