सुमन प्रेम को जानकर बहुत दिनों से मौन।प्रियतम जहाँ करीब हो भला रहे चुप कौन।।प्रेम से बाहर कुछ नहीं जगत प्रेममय जान। सुमन मिलन के वक्त में स्वतः खिले मुस्कान।।जो बुनते सपने सदा प्रेम नियति है खास।जब सपना अपना बने सुमन सुखद एहसास।।नैसर्गिक जो प्रेम है करते सभी बखान।इहलौकिकता प्रेम का सुमन करे सम्मान।।सृजन सुमन की जान है प्रियतम खातिर खास।दोनो की चाहत मिले बढ़े हृदय विश्वास।।निश्छल मन होते जहाँ प्रायःसुन्दर रूप।सुमन हृदय की कामना कभी लगे न धूप।।आस मिलन की संग ले जब हो प्रियतम पास।सुमन की चाहत खास है कभी न टूटे आस।व्यक्त तुम्हारे रूप को सुमन किया...