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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009

गज़ल

जब से मै और तुम हम न रहेतब से दोस्ती मे वो दम ना रह जीते रहे ज़िन्दगी को जाना नहींटेढे थे रस्ते, जमे कदम ना रहे तकरार से फासले नहीं मिटतेजब भी शिकवे हुये हम हम ना रहेरातें सहम गयी दिन बहक गये हैंपलकें सूनी हैं आँसू भी नम ना रहेफिरते हैं सजा के होठों पे हंसीतन्हाई मे अश्क भी कम ना रहेइक जिस्म दो जान हुआ करते थेवो दोस्त अब हमदम ना ...