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गुरुवार, 13 अगस्त 2009

तुम माँ हो - किशोर कुमार खोरेन्द्र

तुम्हारा मन पारस हैऔर तन सोनाउदार हिरदय मे हैभरीसबके लिए करूणामोतियों सा चमकता है तुम्हारा -मुस्कुरानातुम्हारे प्यार के आठवे रंगको आत्मसात करइन्द्रधनुष के रंगों की भी बढ़ जाती है शोभा -हर रोज एक गाय आ जाती हैअपने माथे परतुमसे तिलक लगवानेचीटियों की लाइन लग जाती हैतुमसे -मीठा स्नेह पानेबिल्लियाँ भागती नही -चाहती नही वे भी साथ तुम्हारा खोनाजब तक नही देख लेता तुम्हेटॉमी ॥!जारी रहता उसका रोनासब्जी वाला ,दूध वाला या भिखारीदेख तुम्हे कहते देखोबहना या माँ आईपर तुम रहती सदा ध्यान मेप्रकाश पुंज से तुम भीतर -बाहर घिरी हुईउत्सुकसदासुनने -सबकी वेदनातुम बाटतीसबको...