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गुरुवार, 13 जनवरी 2011

इक जाम फुर्सत में .... {गजल} सन्तोष कुमार "प्यासा"

. तू परछाई है मेरी, तो कभी मुझे भी दिखाई दिया करऐ जिंदगी ! कभी तो इक जाम फुर्सत में मेरे संग पिया कर मै भी इन्सान हूँ, मेरे भी दिल में बसता है खुदामेरी नहीं तो न सही, कम से कम उसकी तो क़द्र किया कर इनायत समझ कर तुझको अबतलक जीता रहा हूँ मैमिटा कर क़ज़ा के फासले, मै तुझमे जियूं तू मुझमे जिया कर मेरा क्या है ? मै तो दीवाना हूँ इश्क-ऐ-वतन में फनाह हो जाऊंगावतन पे मिटने वालों की न जोर आजमाइश लिया कर............