मैं खुद प्यासा रहता हूँ परजन-जन कि प्यास बुझाता हूँबालश्रम का मतलब क्या हैसमझ नहीं मैं पाता हूँ|भूखी अम्मा, भूखी दादीभूखा मैं भी रहता हूँपानी बेचूं,प्यास बुझाऊंशाम को रोटी खाता हूँ|उनसे तो मैं ही अच्छा हूँजो भिक्षा माँगा करते हैंनहीं गया विद्यालय तो क्यामेहनत कि रोटी खाता हूँ|पढ़ लिख कर बन जाऊं नेताझूठे वादे दे लूँ धोखाअच्छा इससे अनपढ़ रहनामानव बनना होगा चोखा|मानवता कि राह चलूँगाखुशियों के दीप जलाऊंगाप्यासा खुद रह जाऊँगा,परजन जन कि प्यास बुझाऊं...