
मोहब्बत के सफर पर चलने वाले राही सुनो,मोहब्बत तो हमेशा जज्बातों से की जाती है,महज़ शादी ही, मोहब्बत का साहिल नहीं,मंजिल तो इससे भी दूर, बहुत दूर जाती है ।जिन निगाहों में मुकाम- इश्क शादी हैउन निगाहों में फ़कत हवस बदन की है,ऐसे ही लोग मोहब्बत को दाग़ करते हैंक्योंकि इनको तलाश एक गुदाज़ तन की है ।जिस मोहब्बत से हजारों आँखें झुक जायें ,उस मोहब्बत के सादिक होने में शक हैजिस मोहब्बत से कोई परिवार उजड़ेतो प्यार नहीं दोस्त लपलपाती वर्क है ।मेरे लफ्जों में,...