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रविवार, 5 जून 2011

मैं हूँ पेड़.........सामाजिक कार्यकर्त्री दिव्या संजय जैन

मैं हूँ पेड़।नीम,बबुल,आम,बड़,पीपल,सागवान,सीसम और चन्दन का पेड़।मैं हूँ पेड़।मैं तुम्हें सब कुछ देता।फूल देता,फल देता।सूखने के बाद लकडी देता।और जो है सबसे आवष्यक कहलाती हैजो प्राणवायु,ऐसी ऑक्सीजन वो भी मैं ही तुम्हें देता।मैं हूँ पेड़।मैं तुम्हें सब कुछ देता।बदले में तुमसे क्या लेता,कुछ भी तो नहीं लेता।और तुम मुझे क्या देते ? बताओ तो जराहाँ लेकिन तुमकाटते हो मेरी टहनियाँ,मेरी शाखाएँ,मेरा तनामुझे लंगडा व लूला बनाते हो।मैं हूँ पेड़।मैं तुम्हें सब कुछ...

पर्यावरण दिवश {कविता} सन्तोष कुमार "प्यासा"

आओ सब मिल जुल कर एक संकल्प में बंध जाएं वृक्षारोपण कर पर्यावरण  दिवस मनाएं इस धरा पुन: वसुंधरा बनाएं शुद्ध, वायु से शुद्ध, जल से शुद्ध मृदा से पर्यावरण को सजाएं इस दिन को कभी न  भूलें कदम कदम पर वृक्ष लगा कर हर दिन "पर्यावरण  दिवस" मनाएं मृदा, वायु, जल को , कर प्रयास अमृतमय बनाएं सब मिल जुल कर एक ही गीत गाएं पर केवल गीत न गाएं निज प्रयास से, इस संकल्प को सार्थक बनाएं आओ सब मिल जुल कर एक संकल्प में बंध जाएं वृक्षारोपण कर पर्यावरण  दिवस मनाएं...