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बुधवार, 14 अप्रैल 2010

जाने वाले कभी नही आते ....मोनिका गुप्ता

जी हाँ ... एक कटु सत्य है.. जाने वालो की बस याद आती है .. वो कभी नही आते .. लेकिन हम फिर भी इस बात को समझ ही नही पा रहे है .. हाल ही मे दिशा की सास बहुत बीमार चल रही थी पर वो उनसे मिलने एक बार भी नही गई ... ना ही फोन पर बात की ना हाल पूछा .. अचानक वो एक दिन मर गई .. फिर तो उसकी हालत देखने वाली थी .. इतना रोई ...इतना रोई कि बस ..अब ये सारा ड्रामा ही लग रहा था ...भले ही उनके जाने के बाद उसके दिल मे प्यार जाग गया हो ..पर अब तो कुछ नही हो सकता ..सोचने वाली बात यह है कि जब आदमी जिन्दा होता है तब हम उसकी कद्र क्यो नही करते ...उसे वो सम्मान क्यो नही...

समीक्षा—— कृति --शूर्पणखा-----

समीक्षा—— कृति --शूर्पणखा -(अगीत विधा- खंड काव्य), रचयिता—डा श्याम गुप्त- समीक्षक---मधुकर अस्थाना, प्रकाशन—सुषमा प्रकाशन , आशियाना एवम अखिल भारतीय अगीत परिषद, लखनऊ, मूल्य-७५/= नारी विमर्श का खन्ड-काव्य : शूर्पणखा समकालीन साहित्य में नारी-विमर्श बहुत महत्वपूर्ण होगया है, इस सम्बन्ध में विभिन्न विधाओं में पर्याप्त सृजन किया जा रहा है, जिसमें नारी स्वतन्त्रता, समानता के साथ ही...