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गुरुवार, 10 जनवरी 2013

नारी (एक बेबसी)

जब नारी ने जन्म लिया था ! अभिशाप ने उसको घेरा था !! अभी ना थी वो समझदार ! लोगो ने समझा मनुषहार !! उसकी मा थी लाचार ! लेकीन सब थे कटु वाचाल !! वह कली सी बढ्ने लगी ! सबको बोझ सी लगने लगी !! वह सबको समझ रही भगवान ! लेकीन सब थे हैवान !! वह बढना चाहती थी उन्नती के शिखर पर ! लेकीन सबने उसे गिराया जमी पर !! सबने कीया उसका ब्याह ! वह हो गयी काली स्याह !! ससुर ने मागा दहेग हजार ! न दे सके बेचकर घर-बार !! सास ने कीया अत्याचार ! वह मर गयी बिना खाये मार !! पती ने ना दीया उसे प्यार ! पर शिकायत बार-बार !! किसी ने ना दिखायी समझदारी ! यही...