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बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

ऐ दर्द न सता मुझे-----(गजल)----दिलबाग विर्क

किस बात की दे रहा सज़ा मुझेहै क्या गुनाह मेरा , बता मुझे .हिम्मत नहीं अब और सहने कीरुक भी जा , ऐ दर्द न सता मुझे .या खुदा ! अदना-सा इंसान हूँ टूट जाऊँगा , न आजमा मुझे .क्यों चुप रहा उसकी तौहीन देखकरये पूछती है , मेरी वफा मुझे .आखिर ये बेनूरी तो छटेकिन्ही बहानों से बहला मुझे .एक अनजाना सा खौफ हावी है अब क्या कहूँ 'विर्क' हुआ क्या मुझे...