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शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

नानी की कहानी.............( संस्मरण) .......पस्तुति - दिव्या पांडे जी

मेरी नानी बहुत प्यारी थी ....वो सभी को प्यार करती थी ...क्या लिखूं उनके बारे में ...शब्द नहीं है मेरे पास ...अब वो नहीं हैं ....बहुत याद आती है उनकी....उनसे मिलना बस गर्मियों की छुट्टियों में ही हो पाता था ... उनके बारे में ज्यादा तो मम्मी से ही जानने को मिला ....मुझे समझ में नहीं आता कि कैसे कोई इतना स्वाभिमानी हो सकता है ....वो पढ़ी-लिखी नहीं थी ...लेकिन अनपढ़ भी नहीं थी ...लिखना पढ़ना जानती थी वो..नाना जी के जाने के साल भर बाद वो भी चली गयीं..भगवान...

क्या है .....(ग़ज़ल)....मृतुन्जय जी

डर,संशय ,बेचैनी क्या है हरदिल में पुश्तैनी क्या है खूनोंके सौदागर पूछें साखी,शबद ,रमैनी क्या है नदियांसबकी आंखों में हैं गंग,जमुन ,तिरवेनी क्या है दिलको दिल से मिल जाने दो आरी,चाकू ,छैनी क्या है सबतो उसके ही बंदे हैं हिन्दू,मुस्लिम, जैनी क्या...