पश्चिम से उन्मुक्त लहर आई है ,खजूर के वो पेड़ केमधुर मिलन की खबर लायी है!तूफ़ान ने तो दोपेड़ो को मिला दिया !जो हम नहीं कर सकतेउन्होंने सिखा दिया !प्रेम भी तो तूफ़ान हैसदभावनाओं की खान हैजोअन्दर से भीपाताल के बहतेनिर्झर के जैसा है!औरशक्ति अपार उसतांडव जट्टाधारी सेप्रकट हो तो वोएक प्रलय के जैसा है !जो हुआ ऐसा अंततबकौन ये विधान रोके?कौन ये तूफ़ान रोके?वो डूबता सूरजभी आ गया हैअब सवार होअपने श्वेत घोड़े पर !इस अनोखे दृश्य केहोंगे हम मनुहारीसाक्षी होगा स्वयंइस काल का पहर !गगन और धराहो जायेंगे संग संगतबकौन ये साकार रोकेकौन ये एकाकार रोके ?क्षितिज समेटे...