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मंगलवार, 12 जनवरी 2010

परी

बचपन मेंमाँ रख देती थी चाकलेटतकिये के नीचेकितना खुश होतासुबह-सुबह चाकलेट देखकर।माँ बताया करतीजो बच्चे अच्छे कामकरते हैंउनके सपनों में परी आतीऔर देकर चली जाती चाकलेट।मुझे क्या पता थावो परी कोई और नहींमाँ ही थी।कृष्ण कुमार य...