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मंगलवार, 6 जुलाई 2010

वो कल सुबह जाएगी.........................नीशू तिवारी

बहुत दिन नहीं हुआ जॉब करते हुए .....पर अच्छा लगता है खुद को व्यस्त रखना........शाम की कालिमा अब सूरज की लालिमा को कम कर रही थी ......मैं चुप चाप तकिये में मुह धसाए बहार उड़ रही धुल में अपनी मन चाही आकृति बना कर ( कल्पनाओं में ) खुश हो रहा था .........कभी प्रिया का हंसता चेहरा नजर आता .........तो दुसरे पल बदलते हवा के झोंकों के साथ आँखें नयी तस्वीर उतार लेती .......... बिलकुल वैसी ही .....जैसे वो मिलने पर( शर्माती थी ) करती थी.............अचानक आज इन यादों ने मेरी साँसों की रफ्तार को तेज़ कर दिया .........करवट बदलते हुए आखिरी मुलाकात के करीब...

रिश्ता खून का .........लेख...........मोनिका गुप्ता

.रक्तदान महादान....रक्तदान पूजा समान ...वगैरहा .. आमतौर पर इस तरह के नारे और स्लोगन सुनने को मिल ही जाते हैं पर आखिर रक्तदान इतना जरुरी है या ऐसे ही ...इस बात मे कोई दो राय नही है कि रक्त का कोई दूसरा विकल्प नही है यानि यह किसी फैक्टरी मे नही बनता और ना ही इंसान को जानवर का खून दिया जा सकता है ..यानि रक्त बहुत ही ज्यादा कीमती है. रक्त की मांग दिनो दिन बढ्ती ही जा रही है पर जागरुकता ना होने की वजह से लोग देने से हिचकिचाते हैं ..मसलन यह सोच कि कितने लोग तो रक्त दान करते ही हैं तो मुझे क्या जरुरत है ..या भई, मेरा ब्लड तो बहुत आम है ये तो किसी का भी...