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शनिवार, 5 मार्च 2011

मेरा जीवन तो शबनम है----(गजल)---श्यामल सुमन

सूरत पे आँखें हरदम है
तेरे भीतर कितना गम है

निकलो घर से, बाहर देखो
प्रायः सबकी आँखें नम है

समझ सका दुनिया को जितना
मेरा गम कितनों से कम है

जितना तेज धधकता सूरज
दुनिया में उतना ही तम है

मुझको चाहत नहीं मलय की
मेरा जीवन तो शबनम है

सब मिलकर के चोट करोगे?
क्योंकि लोहा अभी गरम है

होश में सारे परिवर्तन हों
सुमन के भीतर में संयम है

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

क्षणिकाएं--------(वीनस)

निपटा जल्दी जल्दी
दुनियाभर के किस्से
घर- काम की बातें
खिड़की की देहलीज़ पर
रोज़ हाल ए दिल कहते सुनते हैं
मैं और चाँद !
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रात सरक सरक के काटें
ख़ामोशियों की राह बांचें
पल पल ढलते जाएँ
फिर भी नित रोज़ आयें
मैं और चाँद !