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रविवार, 6 नवंबर 2011

हमें क्या हो गया ?----डा.राजेंद्र तेला


हमें क्या हो गया ?


ज़मीर सो गया


सिर्फ पैसा दिख रहा


परिवार सिमट कर


यादो में रह गया


परिवार के नाम पर


मैं और मेरा रह गया


पड़ोसी से मिलना


समारोह में होता


भाई,बहन में भी


प्रोटोकॉल होता


अपना खून ही अपना


लगता


पिता का खून भी


पराया हो गया


शिक्षा का उद्देश्य


सिर्फ कमाना रह गया


"हम" से बड़ा "मैं"


हो गया


सब निरंतर देख रहे


पीड़ा को झेल रहे


फिर भी होने दे रहे


खुद को लाचार


बता रहे

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

जिन्दगी : बस यूँ ही {कविता} सुमन ‘मीत’




   1

जिन्दगी की खुशियाँ
दामन में नहीं सिमटती
ऐ मौत ! आ
तुझे गले लगा लूँ...........


    2

जिन्दगी एक काम कर
मेरी कब्र पर
थोड़ा सकून रख दे
कि मर कर
जी लूँ ज़रा..........
   


  3

जिन्दगी दे दे मुझे
चन्द टूटे ख़्वाब
कुछ कड़वी यादें
कि जीने का
कुछ सामान कर लूँ........