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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

प्रकाश पर्व दीपावली की शुभकामनाए!


विवेक आलोक विस्तृत हो जग में
छट जाए दुःख दरिद्रता का अंधकार
पग-पग सौहार्द के दीप जलाए
प्रेमालोक में डूब जाए संसार
उर की अभिलाषाए पूर्ण करें
दीपावली का यह शुभ त्यौहार.....
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"हिंदी साहित्य मंच" की ओर से आप सभी को प्रकाशपर्व की हार्दिक शुभकामनाए!

छवि गूगल से साभार....

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

[अंदाज़]............................ नज़्म

इश्क करने वाले जानते हैं , मजबूरी क्या चीज़ है ?
अपनों का दिल तोडना तो यारो बहुत आसान है ।

उड़ने वाले परिंदों को पता है , उचाई क्या चीज़ है ?
ज़मीन पर रेगना तो यारो बहुत आसान है ।

क़यामत तक जीने वालों को पता है , ज़िन्दगी क्या चीज़ है ?
पंखे से झूल कर मरना तो यारो बहुत आसान है ।

जो जीते है दुसरो के लिए उनसे पूछो , पुण्य क्या चीज़ है ?
गंगा नहा कर पाप धोना तो यारो बहुत आसन है ।

गर्दन पर सूली रख जो जीते हैं उनसे पूछो , मेहनत क्या चीज़ है ?
.....अमानत लूट कर ऐश करना तो यारो बहुत आसान है ।

बिंदास कवियों से पूछो यारो ..मौज क्या चीज़ है ??
..घंटो भर में कविता लिखना तो *यज्ञ* बहुत आसान है ।