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बुधवार, 22 जून 2011

मुस्कानों में जहर को देखा.............श्यामल सुमन



घर के ऊपर घर को देखा
और भागते शहर को देखा

किसे होश है एक दूजे की
मजलूमों पे कहर को देखा

तोता भी है मैना भी है
मगर प्यार में कसर को देखा

हाथ मिलाते लोगों के भी
मुस्कानों में जहर को देखा

चकाचौंध है अंधियारे में
थकी थकी सी सहर को देखा

एक से एक भक्त लक्ष्मी के
कोमलता पे असर को देखा

पानी को अब खेत तरसते
शहर बीच में नहर को देखा

बढ़ता जंगल कंकरीट का
जहाँ सिसकते शजर को देखा

यहाँ काफिया यह रदीफ है
सुमन तो केवल बहर को देखा

रविवार, 12 जून 2011

मगर आँख में नीर है........................श्यामल सुमन



कंचन चमक शरीर है
मगर आँख में नीर है

जिसकी चाहत वही दूर में
कैसी यह तकदीर है

मिल न पाते मिलकर के भी
किया लाख तदबीर है

लोक लाज की मजबूती से
हाथों में जंजीर है

दिल की बातें कहना मुश्किल
परम्परा शमसीर है

प्रेम परस्पर न हो दिल में
व्यर्थ सभी तकरीर है


पी कर दर्द खुशी चेहरे पर
यही सुमन तस्वीर है