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गुरुवार, 12 मई 2011

जो वो आ जाए एक बार ***** {कविता} ***** सन्तोष कुमार "प्यासा"

इस कविता को मैंने "महादेवी वर्मा" की कविता "जो तुम आ जाते एक बार" से, प्रेरित होकर लिखा है

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घनीभूत पीड़ा में ह्रदय डूबा

अश्रुओं संग बह रहा विषाद

जल बिन मीन तडपे जैसे

तडपाए, प्रेम उन्माद

फिर सजीव हो जाए आसार

जो वो आ जाएं एक बार

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उसे पाने की बढ़ी लालसा ऐसी

पल पल होती चाहत प्रखर

ह्रदय के कोरे पृष्ठों में

लिख दो आकर, प्रिताक्षर

मेरे मन के उपवन में छा जाए बहार

जो वो आ जाएं एक बार

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अलि कलि पर जब मंडराए

नभ पर विचरें जब विहंग

खो जाऊं आलिंगन में उसकी

मन में उठे ऐसी तरंग

बज उठें ह्रदय के तार तार

जो वो आ जाएं एक बार

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मेरे मस्तिष्क के हर कोने में छाई

उसके स्मृति की सुवासित सुरभि

अब न रुके आवेग अनुरक्ति का

समय, काल, अंतराल बताए

प्रीत न दाबे दबी

एक बने जीवन का आधार

जो वो आ जाएं एक बार

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मंगलवार, 10 मई 2011

"सूरज आया"......................ललित कर्मा

सबको राम राम,
वह सुबह बहुत मासूम थी जब मै जागा बिलकुल नन्हे शिशु सी | प्रारंभ बच्चो को सिखाने के तरीके से हुई और फिर दोपहर, शाम, रात तक आगे बढ़ी और फिर अंत से शुरुआत की ओर चली .... हर रात के बाद सुबह होती है ...


"सूरज आया"
कौन आया?
सूरज आया,
क्या लाया?
उजाला लाया|१|
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उठो, उठो,
भोर हुई,
जल्दी करो,
रात गई|२|
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मुह हाथ धोओ,
पेट साफ करो,
ठंडा/कुनकुना नहाओ,
और ईश का ध्यान करो|३|
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खाना खाओ,
खाली पेट न यूँ घुमो,
फिर अपने काम लगो,
लगन से उसमे रामो|४|
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घर आओ,
अब दिन ढला,
नीड़ हमारा है,
सबसे भला|५|
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दीप-बाती आओ जला ले,
ईश वंदना करें,
हे प्रभु,हे कृपालु,
तू संताप हरे|६|
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भूख लगी,
अब खाना खाए,
धन्यवाद कर,
प्रभु के गुण गए|७|
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राम भला हो,
अब नीद सताएं,
सुंदर सपनों में,
अब खो जाये|८|
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उठो कोई आया है,
कौन आया?,
सूरज आया,
उजाला लाया|९|
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चलो उठते है,
प्रथम धन्य हे भगवन,
भली नींद हुई,
दिखाए सुंदर स्वपन